Searching for Peace

Exhibition of Paintings by Infinity Group

@ College of Arts & Crafts, Patna University, India
24 – 26 March 2009

Open Paintings Exhibition by Infinity Group

@ Bodhgaya Temple, India
28 March 2009


Best Wishes

Tshering W. Sherpa, Second Secretary (PIC), Press, Information & Culture Wing, Embassy of India, Kathmandu
I am glad to note that “Infinity” artist group is organizing a painting exhibition at ‘College of Arts and Crafts’ at Patna during 24-26 March, 2009. The same group will be displaying its paintings in an open exhibition in Bodhgaya on March 28, 2009 under the title “Searching for Peace”. The relationship between Bodhgaya and Lord Buddha’s search for peace is self-explanatory.

The event will not only provide an opportunity to the artists to showcase their paintings and artistic talent but will further enhance the bond between India and Nepal through this cultural exchange.

I am sure that this group would evoke good response among art lovers in Patna and the paintings leave a lasting impression in their minds.


Best Wishes

Manuj Babu Mishra, Senior Artist/Painter – 7 March 2009
First of all, I want to congratulate heartily to Infinity Group for their outstanding achievements in the field of Creative Art. They have already exhibited in so many exhibitions are well known in among the artists and art arena in Nepal. For the forthcoming exhibition, I want to congratulate them and express my best wishes for the success.


कलाकृतियों में विश्व शांति का संदेश

Jagran City – 26 March 2009
दुनिया में व्याप्त हिंसा और अशांति का विरोध का अपने-अपने तरीके हैं। नेपाल से आए कलाकारों ने कलाकृतियों के माध्यम से ‘विश्व शांति’ का संदेश दिया है, जो अपने-आप में अनूठी हैं। पटना आर्ट एंड क्राफ्ट कालेज के आर्ट गैलरी में ‘सर्चिंग फोर पीस’ सीरीज में 45 कलाकृतियों में बुद्ध के संदेश को बखूबी दर्शाया गया है, जो कलाप्रेमीयों के लिए अत्यंत सुखद अहसास है। भारतीय राजदूतावास, काठमाण्डू ने नेपाल के तीन उभरते प्रतिभाशाली कलाकारों को बिहार भेजा है। कालेज के प्राचार्य डा. अनुनय चौबे के मुताबिक, कला प्रदर्शनी के जरिये यह सांस्कृतिक समागम का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

काठमाण्डू निवासी गौरव श्रेष्ठ ने स्नातक की डिग्री कामर्स से ली और फिर मल्टी मीडिया व एनिमेशन से जुड गए। बचपन से कला के प्रति रुझान रखनेवाले गौरव को पेंटिंग में आने को मजबूर किया, लेकिन बिना कला गुरु के गौरव ने पेंटिंग को सीखा। गौरव की 15 कलाकृतियां आर्ट गैलरी में लगी है। गौरव ने बताया कि ‘सर्चिंग फोर पीस’ सीरीज के तहत ‘विश्व शांति’ का संदेश फैलना ही कलाकृतियों का मूल उद्देश्य है। ललित कला कालेज, काठमाण्डू से फाइन आर्ट में स्नातक की डिग्री पाए विनोद कुमार गुप्ता कलाकृतियों में भगवान बुद्ध के प्रतीक के रूप में पीपल के पत्ते का इस्तेमाल किया गया है। चित्रकार गौरव ने बताया कि बुद्ध का शांति संदेश ही विश्व में अमन बहाल रख सकता है। चित्रकार विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि उनकी कलाकृतियों में विश्व शांति का संदेश दिया गया है, जो आज सबसे ज्यादा जरूरी है। प्रकृति रंग से लबरेज कलाकृतियों में भगवान बुद्ध का शांति संदेश, बुद्ध का जन्म स्थान, अशोक का स्तंभ, बौद्ध स्तूप, ओम और नेपाल मे। 12 वर्ष पर होनेवाले सम्यक पूजा के अलावा वहां की पारंपरिक पर्व-त्योहारों को सुन्दर निरूपण किया गया है। कई कलाकृतियों में मंत्रो को ‘वेब’ यानी तरंगो के रूप में बखूबी दर्शाया गया है।


शांति की खोज में बुद्ध की पेंटिंग

Prabhat Khabar – 25 March 2009
पटना। इंफिनिटी ग्रुप नेपाल के तीन युवा कलाकारों (रमेश केसी, गौरव श्रेष्ठ और विनोद गुप्ता) की तीन दिवसीय पेंटिंग प्रदर्शनी आर्ट एंड क्राफ्ट कालेज में लगायी गयी है. इसका उद्‍घाटन मंगलवार को पटना आर्ट कालेज के प्राचार्य डा अनुन्या चौधरी ने किया. आर्ट गैलरी में कुल 45 पेंटिंग की प्रदर्शनी लगायी है, जिसमें भगवान बुद्ध की शांति खोज का विषय रखा गया है. कैनवास पर एक्रेलिक कलर से उकेरे गये हर पेंटिंग में भगवान बुद्ध के शांति संदेश दिखती है. एक ओर विश्व संस्कृति के पतन तो दूसरी ओर ‘‌ॐ’ के शाश्वत रूप को पेंटिंग के माध्यम से बडी ही सजीवता के साथ उकेरा गया है. पेंटिंग के जरिये बुद्ध की शक्ति (भिक्षा पात्र) से अनंत तक गिरते शक्ति प्रवाह रूपी पैसा जो कभी खाली नहीं होता है, लेकिन उसका उपयोग करने वाला कोई नहीं है. दिया प्रकाशमान रहते हुए भी संसार के लोभ, पाप से अंधकारमय हो गया है. हर जगह अंधेरा ही अंधेरा है. इन सभी विषय वस्तुओं को ब्लू, लाल पीला आदि रंगो के संयोग से उकेरा गया है जो हर किसी को सोंचने पर मजबूर करता है. भगवान बुद्ध के जन्म स्थल लुम्बिनी को पेंटिंग में दिखाया है. विनोद कुमार कहते हैं कि ॐ के सिवा इस संसार में कुछ भी नहीं है. बुद्ध के खुले आंखों में शक्ति की धार इसी उम्मीद के साथ बह रही है कि विश्व में शांति और प्यार का संचार बह रही है कि विश्व में शांति और प्यार का संचार होता रहे. वे बताते हैं कि इन पेंटिंग के माध्यम से नेपाली संस्कृति को दिखाया गया है.

कूचियों के सहारे शांति की खोज, नेपाली चित्रकारों की तीन दिवसीय पेंटिंग प्रदर्शनी शुरू | Hindustan – 25 March 2009
पटना। कैनवास पर रंगों व कूचियों के सहारे शांति की तलाश। नेपाल के तीन युवा कलाकारों द्वारा बौद्ध स्थलों पर रहकर बनायी गयी पेंटिंग्स यही कुछ कहती नजर आती है। रंगों का बखूबी इस्तेमाल इन पेंटिंग्स में हुआ है।

कला व शिल्प महाविद्यालय में मंगलवार से ‘सर्चिंग फार पीस’ नाम से तीन दिवसीय पेंटिग्स प्रदर्शनी शुरू हुई। प्राचार्य अनुनय चौबे ने प्रदर्शनी का उद्‍घाटन किया। प्रदर्शनी में नेपाल के तीन युवा कलाकारों रमेश केसी, गौरव श्रेष्‍ठ व विनोद गुप्ता द्वारा बनायी गयी 45 पेंटिंग्स शामिल किये गए हैं। इन चित्रों की प्रदर्शनी 28 मार्च को बोधगया मंदिर में भी होगी। साथ ही 26 मार्च को नेपाली कलाकार आर्ट कालेज के छात्रों के साथ वर्कशप भी करेंगे। कलाकारों ने बताया कि उन्होंने ये सारे पेंटिंग्स नेपाल स्थित स्वयंभूनाथ स्तूप, बौद्धनाथ स्तूप व हिरण्य वर्ण महाविहार में रहकर बनाए हैं। हर जगहों पर हर कलाकार ने एक-एक दिन रहकर पांच-पांच पेंटिंग्स बनाए। गौरव की पेंटिंग्स में पांच रंगो का खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है। खासकर लुंगटा का लोगो हर चित्र में नजर आया। रमेश की पेंटिंग्स बुद्ध शैली में हैं। इसमें भी कलर का कमाल दिखा। विनोद के चित्रों में बालू, बोरा, चावल, नेपाली सिक्के के सहारे अपनी बात कही गयी है। साथ में गुरु गोरखनाथ के गुरु मछिन्दरनाथ का भी चित्र है।


Searching for peace

i next – 25 March 2009
PATNA (24 March) : ‘गड आफ पीस’ भगवान बुद्ध को केन्द्र में रख कलर, टेक्सर, बुद्धन शैली आर्ट एवं बुद्ध धर्म के अनेक सिंबल के साथ खुलकर प्रयोग का नाम है ‘सर्चिंग फार पीस’. मंगलवार को कालेज आफ आर्ट्स एंड क्रफ्ट में इसी नाम से नेपाल के ‘इन्फिनिटी ग्रुप’ के कलाकारों का आर्ट एक्जीबिशन दर्शकों के लिए खोला गया. नेपाल के स्वयंभू नाथ व बुद्ध नाथ स्तूप एवं हिरण्य वर्ण महाविहार (गोल्डेन टेंपल) में शांति की खोज करते हुए एक दिन में बनायी गयी इन सभी पेंटिंग्स में कलात्मक आध्यात्म की छाप साफ देखी जा सकती है.

बोधतया में भी लगेगा एक्जीबिशन

नेपाल के तीन आर्टिस्ट गौरव श्रेष्‍ठ, विनोद गुप्ता व रमेश केसी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी का उद्‌घाटन कालेज के प्रिंसिपल अनुनय चौबे ने किया. पेंटिंग्स में रमेश ने धार्मिक महत्व के सिंबल एवं गौरव श्रेष्ठ ने प्रेयर फ्लैग ‘लुंगटा’ पर रंगों के साथ जमकर प्रयोग किया है. इस प्रयोग में रंगों के द्वारा फाइव इलिमेंट को साफ देखा जा सकता है.

इससे हटकर बिनोद के गुप्ता ने अपनी पेंटिंग्स में बुद्ध के वज्र, स्तूप, भिक्षापात्र व दीया के साथ खेला है. ब्रिटिश पेपर पर वाटर कलर से उन्होंने बारह साल में एकबार होने वाली समयेक पूजा व गुरु गोरखनाथ के देवता रातो मचिन्द्रनाथ एवं बुद्ध के जन्म स्थल को दिखाया है.


Paintings from Nepal advocate global peace

Hindustan Times – 25 March 2009
A PAINTING exhibition, strongly reinforcing the necessity for peace’s healing touch in these times of religious intolerance and the strife and anxiety that they represent, may have appeared to most viewers as somthing of an anachronism in these troubled times. However, the exhibition ‘Searching For Peace’ that a Nepal-based group of artists that calls itself the Infinity Group had mounted today at the art gallery of the College of Arts and Crafts here had never been more pertinent.

Gaurav Shrestha’s Prayer for Humanity which had red-tinted miniatures of Hindu religious texts in one corner that gradually faded into a variety of tinted blues was outstanding for its visual impact, not because of the message it sought to portray but because it raised questions about how symbols that represented peace and goodwill were being swallowed up in a vortex of violence today. “Nepal, as you must be aware, had recently come out of an extremely unpleasant and bloody phase. Religion was a taboo, which the Maoists went out of their way to discurage, not that they were very successful. The yearning for peace is very pronounced there, particularly amonst in the rural regions. It is this trauma that I have, through my painting attempted to portray,” he said.

Peace With Love, for that is what Binod Gupta had titled his acrylic paintng was a touching interpretation of how Hinduism and Buddhism that had till lately flourished in that country been swamped into oblivion by the Maoist over-drive. The Peepul leaves, a dull gray denoting the eclipsed of Buddhism were strikingly juxtaposed against blackish-blue and red hieroglyphs denoting the Maoist philosophy and its short shrift to peace-an apt comment, as he pointed out to the prevailing situation in his country.

Ramesh KC’s Mokshya, which he stressed, was how the famed Swayambhu temple had gradually begun to look like of late, robbed of its serenity, had so insistently troubled him that he could not but help but depict it as a temple shorn of the feeling of ‘moksha’ that most experienced on seeing it. His collage, a helter-skelter mix of coliurs is a remarkable comment on the insignificance of peace in his troubled homeland.

The 45 paintings that the Infinity Group has showcased at the college’s art gallery are also a socio-political statement that exposes the casualty to which Peace in Nepal has been reduced to. The Searching For Peace exhibition would be showcased in Bodh Gaya on March 28, after which the group would travel to Bangladesh for mounting a workshop there.


काठमाण्डू के कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित

Patna Mahanagar – 25 March 2009
पटना | काठमाण्डू नेपालके ललितकलाकर्मी विनोद कुमार गुप्ता, गौरव श्रेष्‍ठ और रमेश केसी की ‘शांति की खोज’ शीर्षक संयोजित कला प्रदर्शनी तीन दिनों के लिए आजसे पटना कला एवं शिल्प महाविद्यालयके कलादीर्घामें आरंभ हुई। भारतीय राजदूतावास काठमाण्डू के प्रेस सूचना एवं संस्कृति विभागके सौजन्यसे इनफिनिटी ग्रुप की इसे प्रदर्शनी का उद्‌घाटन करते हुए महाविद्यालयके प्राचार्य डा. अनुनय चौबेने कहा कि इन कलाकृतियों से कलाके सभी छात्र-छात्राओंको सीख लेनी चाहिए। नेपालके कलाकारोंकी कल्पना, भाव और कलाकृतिमें उसकी अभिव्यक्तिको देखने परखनेका यह सुअवसर है यहांके कलाकारोंके लिए। उन्होंने कहा किं कलाकार हमेशा खुले विचारका व्यक्ति होता है वह आजीविकाके उद्देश्य से कलाकृति नहीं करता। कलाकार अपने यहांके सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक परिदृश्यको जनजीवन में वयक्त करता है अपनी कलाकृति में।

प्रदर्शनी में बौद्ध दर्शनपर केन्द्रित कलाकृतियां सूचनापरक एवं ज्ञानवर्द्धक है। इस सन्दर्भमें विनोद कुमार गुप्ताने बताया कि बौद्ध धर्म में बारह वर्षोंपर आयोजित होनेवाले सम्यक पूजा अनुष्ठान, प्रार्थनाके रहस्य एवं धर्मोपदेशपर आधारित ४५ कलाकृतियां प्रदर्शित की गयी है। ये सभी कलाकृतियां काठमाण्डू के इनफिनिटी ग्रुप द्वारा आयोजित कला कार्यशालामें बनायी गयी। कार्यशालाका आयोजन ‘शान्ति की खोज’ शीर्षकसे काठमाण्डू के स्वयंभू स्तूप और ललितपुरके हिरणयवर्ण महाविहार स्वर्ण मंदिरमें गत ९ मार्चको हुआ। इन कलाकृतियोंकी प्रदर्शनी २८ मार्चको बोधगया मंदिर परिसरमें आयोजित होगी।

इस अवसरपर कला महाविद्यालयके शिक्षक कवि कलाकार दिनेश दिवाकर, राखी कुमारी सहित कई वरिष्ठ कलाकार एवं छात्र छात्रायें उपस्थित थी।


नेपाली कलाकार पेंटिंग के जरिये देंगे शान्ति का संदेश

Prabhat Khabar – 24 March 2009
जिस तरह से भगवान बुद्ध ने पूरी दुनियां मे घुम-घुम कर शांन्ति का संदेश दिया था. ठीक उसी तरह अब नेपाल के कलाकार भगवान बुद्ध की पेंटिंग के जरिए शांति का संदेश बाटना चाहते हैं. इसी उद्धेश्य से नेपाल के तीन कलाकार पटना आये हैं. नेपाली कलाकारों की बनायी हुई चित्रों की प्रदर्शनी मंगलवार से पटना आर्ट कालेज में शुरू होने हा रही हैं, जो तीन दिनो तक चलेगी. इस प्रदर्शनी का मुख्य विषय ‘शांति की तलाश’ हैं. विनोद कुमार गुप्ता, गौरव श्रेष्‍ठ और रमेश केसी नाम के इन कलाकारों ने भगवान बुद्ध की कुल 45 पेंटिंग अब तक बना चुके हैं और इनके द्वारा तैयार सभी चित्रों को इस प्रदर्शनी में जगह दी जाएगी. नेपाली कलाकार गौरव श्रेष्‍ठ और विनोद कुमार गुप्ता ने बताया की ये सभी पेंटिंग नेपाल में स्थित भगवान बुद्ध के स्वयंभूनाथ स्तूप, बौद्ध नाथ स्तूप और हिरण्य वरणा महावीर स्वर्ण मंदिर पर आधारित है. पटना के बाद एक दिन के लिए इस प्रदर्शनी का आयोजना 28 मार्च को बोधगया में और अप्रैल के पहले सप्ताह में बांगलादेश में आयोजित किया जायेगा. इससे पूर्व दार्जलिंग और सिक्किम में प्रदर्शनी का आयोजना किया जा चुका है. 2002 में इंफिनिटी ग्रुप की नीव रखी गयी और लगातार सात-आठ सालों से इस प्रदर्शनी का आयोजना नेपाल में होता आ रहा है. अब वे लोग शांति का प्रकाश फैलाने की तमन्ना लिए इस प्रदर्शनी का आयोजना दुनियाभर में करना चाहते है.


‘Searching for Peace’ Nepalese artists exhibit in India

The Rising Nepal – 20 March 2009
A group of young artists of Infinity Group Thursday left Kathmandu for India to exhibit their paintings having the theme of ‘searching for peace.’

About 45 acrylic and collage medium paintings will be put on display.

Apart from showcasing Nepalese original artworks, the event is expected to cement the cultural ties between Nepal and India at the people’s level.

They will exhibit their paintings, which they created at Swoyambhu Nath Stupa, Boudha Nath Stupa and Hiranya Varna Mahabihar (Golden temple), according to group’s member Gaurav Shrestha.

During their three-week-long stay, they exhibit their paintings in art gallery of College of Arts & Crafts, Patna University, India from 24th to 26th March and in Bodhgaya Temple, Bihar on March 29 after which they will fly to Dhaka to participate in a workshop.


बोधगयामा नेपाली कलाकारको कला

Nepal Samacharpatra – 17 March 2009
भारतको बोधगया मन्दिरप्रांगणमा आगामी २८ तारिखमा आयोजना हुने खुला चित्रकला प्रदर्शनीमा सहभागी हुन नेपालका तर्फबाट तीन कलाकार त्यसतर्फ जाने भएका छन्।

सो प्रदर्शनीमा भाग लिन आगामी बिहीबार इन्फिनिटी ग्रुपका कलाकारत्रय गौरव श्रेष्ठ, विनोदकुमार गुप्ता र रमेश के.शी. त्यसतर्फ प्रस्थान गर्दै छन्। पटना विश्वविद्यालयले आयोजना गर्न लागेको सो चित्रकला प्रदर्शनीमा कलाकारत्रयले आफ्ना ४५ सिर्जना प्रदर्शनी गर्नेछन्।

शान्तिको खोजी शीर्षकमा हुने बोधगयाको तीनदिने प्रदर्शनीपश्‌चात् कलाकारत्रय गौरव, विनोद र रमेश बंगलादेशको ढाकामा आयोजना हुने अर्को संयुक्त कला कार्यशलामा सामेल हुनेछन्। राजधानीमा आधा दर्जन संयुक्त प्रदर्शनीमा उत्रिसकेका गौरव, विनोद र रमेशको विदेशमा यो पहिलो प्रदर्शनी हुनेछ।